सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

छोटकी ननदी के करनवा पिया चटकनवा मरले ना || भोजपुरी लोकगीत : डॉ मुकेश पाण्डेय

नईहर में बाबू माई रखलें दुलार के हो 
अबहीं ले शासत सखी सहिलें भतार के हो 
गईनी सुते ख़ातिर सिरहनवा पिया चटकनवा मरले ना 
छोटकी ननदी के  करनवा  पिया चटकनवा मरले ना 


हित नात जुटल रहे पड़ल रहनी लाज में 
सैयां जरे कैसे सूती घर के समाज में 
हाथ जोड़े लगनी केनियो न भगनी 
फोरले हाथ के हो कंगनवा पिया चटकनवा मरले ना 


तनियो सा ग़लती ख़ातिर बाड़ें खिसियाईल 
उनके फिकिर में देहियाँ जात बा सुखाईल 
ग़लती का कईनी सोझा हम भईनी 
देहब नईहर में ओरहनवा पिया चटकनवा मरले ना 


पाण्डेय मुकेश ' कइसन मिलल बाड़ें मरद 
ओहिदिन के मारल चटकन होता बड़ी दरद 
कतना ले सहीं कइसे हम रहीं 
भेजनी देवरु के दवाखानवा पिया चटकनवा मरले ना 

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