कुछ नाहीं करब साली होलिया में अइसन विस्वास दिहल
बाक़ी तू पियला के सुर में जीजा जी हो नाश दिहल
रंगे के बहाने हमके धईल अँकवारी में
जबरी पटक दिहल बिचली कोठारी में
कईल मनमानी हमर ओदे काँचे खेतवा के चांस दिहल
बाक़ी तू पियला के सुर में जीजा जी हो नाश दिहल
दगिया लगाई दिहल नए रे समीज में
उठताटे लहर हमरा भीतरी के चीज़ में
अपना जवनिया के हमरा जवानी में लहास दिहल
बाक़ी तू पियला के सुर में जीजा जी हो नाश दिहल
अब नाहीं कबो तहरा संगे खेलब होली
कईल दुर्गति हमार फार दिहल चोली
पाण्डेय मुकेश " काहे ख़ातिर गाल हमरो काट दिहल
बाक़ी तू पियला के सुर में जीजा जी हो नाश दिहल
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