गुरुवार, 27 अगस्त 2015

भोजपुरी मुक्तक [4 ] डॉ मुकेश पाण्डेय

हमरा घाव से तनी अउरी खेल 
अभी त सउंसे रात बाक़ी बा 
जिनगी ख़तम हो गईल लेकिन 
जिए के चाह अभिन बाक़ी बा 

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