गुरुवार, 27 अगस्त 2015

पराजय - डॉ.मुकेश पाण्डेय

वे बेचारे एक अध्यापक 
जिंदगी भर नैतिक शिक्षा का पाठ 
सबको सम्मान दो
 कभी झूठ मत बोलो 
कभी गलत मत करो 
और भी न जाने क्या-क्या 

और फिर उस ज़माने का माँगे राम 
उन्हीं की कक्षा में पीछे बैठा 
ऊँघता      मारते मास्टर जी 
आज चरणों में सर के साथ 
बहुमूल्य शॉल 
छड़ी को सर आँखों पर लेते हुवे 
गुरु जी   नमन आपकी उस शिक्षा को 
जिसका विरोध करते-करते 
सब कुछ पाता हुआ 

ये दुनिया मेरी है 
और   वे बेवस से 
देखते हुवे उस ओर 

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