गुरुवार, 27 अगस्त 2015

दीवाने हम है मुरलिया के - डॉ.मुकेश पाण्डेय

तेरी  राह जोहे राधा गोरी 
वो तो आई है चोरी चोरी 
कहाँ करी देर सांवरिया रे 
तुझे मालूम नहीं है क्या ?
                  दीवाने हम है मुरलिया के 

आई पूनम की रात सुहानी प्रीत की बजे शहनाई 
काली घटा फिर घिर आई है चले पवन पुरवाई 
आजा आजा रे कुँवर कन्हैया 
मेरी पार लगदे तू नैया 
कि तुझको ढूंढ़े नजरिया रे 
तुझे मालूम नहीं है क्या ?
                  दीवाने हम है मुरलिया के 

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