तू झूम झूम के साक़ी मचल मचल के पिला
शराब फिर मुझे सागर बदल बदल के पिला
शराबखाने में हंगामा क्या ज़रूरी है
सम्हल सम्हल के पिए हम सम्हल सम्हल के पिला
बसंती धूप में जैसे की वर्फ़ पिघले है
नशे के आँच में तू भी पिघल पिघल के पिला
ये तेरा रिन्द बड़ी मुद्द्तों से प्यासा है
हदे शराब से आगे निकल निकल के पिला
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