माँ का लिहाज़ बाप की इज़्ज़त नहीं रही
बच्चों में बात सुनने की आदत नहीं रही
मिलने न आये ख़त न लिखे फोन तो करे
क्या उसके पास इतनी भी फ़ुरसत नहीं रही
है मालिकों के पास खज़ाने भरे हुवे
मेहनतकशों के वास्ते उज़रत नहीं रही
ये कैसी चांदनी है कहीं दिलकशी नहीं
ये कैसी धूप है कोई शिद्द्त नहीं रही
पंडित हो मौलवी हो गवर्नर हो या वजीर
इस दौर में किसी की भी वक़्वत नहीं रही
बच्चों के बच्चे जब से बड़े हो गए मुकेश"
मेरे ही घर में मेरी ज़रूरत नहीं रही
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