शनिवार, 22 अगस्त 2015

ऐसी दीवानी हुई मैं राधा, मनमोहन मनभावन की - डॉ. मुकेश पाण्डेय

सोना सोना -सोना सोना ,तेरा रूप है सलोना 
         जैसे छाई घटा हो सावन की 
ऐसी दीवानी हुई मैं राधा,  मनमोहन मनभावन की 

तू ही गवईया है तू ही बजईया,     अधरों पे तेरी ये वंशी 
जाऊं जिधर मुझे खिंच ही लाये बस में बसईया ये वंशी 
तू है दीनदयाल, नन्दलाल तू गोपाल 
तुझे रहती है सुध बृजबालन की 
ऐसी दीवानी हुई मैं राधा,  मनमोहन मनभावन की 

तेरे ही रंग में रंगी हूँ मैं गिरधर ,छोड़ दिया जग सारा 
तेरे ही प्यार में जोगन बनी  हूँ लेके ये मन इकतारा 
पाण्डुरंग -पाण्डुरंग तू मुरारी मुकुंद 
मुझे तेरी चाहत तुझे माखन की 
ऐसी दीवानी हुई मैं राधा,  मनमोहन मनभावन की 

दिल हो मेरा ये कदम्ब की डाली,  मुरली बजे तेरी इसमें 
या फ़िर ये बन जाये दर्पण सरीखा, सूरत सजे तेरी इसमें 
चाहे शेष या विशेष ,हो दिवेश" या मुकेश"
सभी मांगे धूलि तेरे चरणन की 
ऐसी दीवानी हुई मैं राधा,  मनमोहन मनभावन की 


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