वाया पाण्डेयपुर चौराहा
शनिवार, 22 अगस्त 2015
हसीन ख्वाबों में - डॉ. मुकेश पाण्डेय
तुझे मैं अपना नहीं सकता
मगर इतना भी क्या कम है
कि कुछ मुद्दत
हसीन ख्वाबों में रहकर
जी लिया मैंने
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