रविवार, 16 अगस्त 2015

कि देवी मोरी खोली ना केवाड़ {भोजपुरी देवी गीत } डॉ. मुकेश पाण्डेय

हम बानी ठाढ़ि दुवरिया
कि  देवी मोरी खोली ना  केवाड़ 

एक हाथे फुलवा-दूसरे हाथे झुलवा
लाली चुनरिया लहराय
लिहले सेनुरवा- सिन्होरवा  
कि  देवी मोरी खोली ना  केवाड़    


चनन अक्षत रोरी -घियना के दियना
ढरके अंसुईया के धार
हम करबो तोहरो सिंगरवा
कि  देवी मोरी खोली ना  केवाड़ 


सबका के तरलु मईया -पाप ताप हरलू
दिहलू सरनिया के छाँह
हमरो बा तोहरे असरवा
कि  देवी मोरी खोली ना  केवाड़  

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