अब के साल सावन में जब घटाएं छायेंगी
हम भी अपने हाथो से मैकदा सजायेंगे
तेरी याद के सागर दोस्तों से टकराकर
बेवफा ये सोचा है हम तुझे भुलायेंगे
हमको आश्ना कहदे अहदे दिलरुबा कहदे
बेरूख़ी से अच्छा है हमको तू बुरा कहदे
तुझसे प्यार करते हैं हम भी तुझपे मरते हैं
हम भी हाथों से तेरी आरती उतारेंगे
तू ही मेरी मंज़िल है मेरी जां मेरा दिल है
जिन्दगी समन्दर है और तू ही साहिल है
प्यार की कहानी है मेरी जिंदगानी है
पी के तेरी आँखों से हम भी लड़खड़ाएँगे
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