रविवार, 16 अगस्त 2015

रात मत बुनो !- डॉ. मुकेश पाण्डेय

सुनो
रात मत बुनो !

भीड़ की बात मत सुनो
जब अपनी राह  चुनो
स्वयं को सुनो !

घर अथवा घाट नहीं
मरने को खाट नहीं
सड़क को चुनो !

इस दुनिया के अंदर
अँधियारा डगर डगर
रुई सा धुनों !

बनवासी लौटे घर
जगमग हो अवध नगर
स्वप्न ये बुनो !

घर घर हो दीप पर्व
खंडित हो तम का गर्व
ज्योति मन्त्र बुनो !

रात मत बुनो ....


http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/MERI-TERI-USKI-BAAT/entry/%E0%A4%B0-%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%A4-%E0%A4%AC-%E0%A4%A81

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