वाया पाण्डेयपुर चौराहा
रविवार, 16 अगस्त 2015
यादें -डॉ. मुकेश पाण्डेय
डरता हूँ यादों को छूने से
कभी-कभी हाथ जल जाया करते हैं
वर्फ़ से परन्तु फ़िर भी छू लिया करता हूँ
यादों को
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