उसके प्यार ने जीना
जीना सिखाया है
टहनी पर एक पत्ती फूटती है
धरती को तोड़कर
बीज द्वीपत्र होता है
जड़ें पुरे पेड़ को ख़ुराक देती है
फूल जब खिलते हैं
तो जड़ें कुछ मांगती नहीं
फल के पकने पर डालियाँ
सहज विनत होती हैं
अपने प्यार को पानी पर लिखा
उसे जलाकृतियों में बेचैन पाया है
लहरों से उद्वेलित जल
तटों की ओर जाता है
हर जन्म के बाद
नया क्षितिज खुला पाया
धरती ने मुझे हर बार
सहने को कहा है
तप्त ज्वालाओं के बीच
हिम किरीट की रक्षा
कैसे करूँ

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