शनिवार, 15 अगस्त 2015

कर कर दो करम माँ - डॉ. मुकेश पाण्डेय

तुमसे ही ये  संसार है माँ 
हूँ दीन -हीन  लाचार  मैं माँ 
तुमसे बंधी  ये प्रीत की डोरी जाये कहाँ हम 
कर  कर दो करम माँ - कर  कर दो करम !

चारो ओर  अंधेर घना  है ,आये नज़र ना उजाला 
ये दुःख  का संसार  है  मईया ,तुम हो दीन दयाला 
कष्ट मिटे ये कैसे करूँ क्या जतन ?
कर  कर दो करम माँ - कर  कर दो करम !
डॉ मुकेश पाण्डेय 



मैं हूँ विद्या विहिन हे माता ,तुम हो ज्ञान विषारद 
तुम्हरी कृपा से ग्यानी बने हैं कबीरा तुलसी नारद 
कर दो हमारी भी सफल जनम 
कर  कर दो करम माँ - कर  कर दो करम !

तेरी कृपा से जड़ और चेतन शेष हो या विशेष 
तू ममता की सागर मईया ,मैं तेरा बेटा "मुकेश "
दुःखों का ये भार  माता करो मेरे कम 
कर  कर दो करम माँ - कर  कर दो करम !



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें