खेले वो दिल के साथ कि खेले जिगर के साथ
अबरू की भी कमान है ,तीरे -नज़र के साथ
मत पूछिये ज़बां से मेरी तुम शबे -फ़िराक़
क्या-क्या हुवे मज़ाक मेरी चश्मे -तर के साथ
दिल की लगी से जो हुवे मज़बूर हर तरह
रोये लिपट लिपट के वो दीवारो-दर के साथ
हर राहरौ को इसकी ख़बर तक न हो सकी
कुछ राहज़न भी चलते रहे , राहबर के साथ
मुझसा भी ज़िंदगी में न मज़बूर हो कोई
मह्शर में ले गए हैं मुझे क़त्ल गर के साथ
जब तक हमारे दिल में है मंज़िल की आरज़ू
उलझेंगे गाम-गाम पे ख़ौफ़ो -ख़तर के साथ
मुकेश"जहाँ में क्या करे रुस्वा कोई उन्हें
जो लोग ऐब करते हैं लेकिन हुनर के साथ
अबरू की भी कमान है ,तीरे -नज़र के साथ
मत पूछिये ज़बां से मेरी तुम शबे -फ़िराक़
क्या-क्या हुवे मज़ाक मेरी चश्मे -तर के साथ
दिल की लगी से जो हुवे मज़बूर हर तरह
रोये लिपट लिपट के वो दीवारो-दर के साथ
हर राहरौ को इसकी ख़बर तक न हो सकी
कुछ राहज़न भी चलते रहे , राहबर के साथ
मुझसा भी ज़िंदगी में न मज़बूर हो कोई
मह्शर में ले गए हैं मुझे क़त्ल गर के साथ
जब तक हमारे दिल में है मंज़िल की आरज़ू
उलझेंगे गाम-गाम पे ख़ौफ़ो -ख़तर के साथ
मुकेश"जहाँ में क्या करे रुस्वा कोई उन्हें
जो लोग ऐब करते हैं लेकिन हुनर के साथ
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