जाहु हम जनिती शीतली अइहें अंगना
त रुनु झुनू ना ,बजवइतीं बारहो बजना
अंगना में निमिया के गछिया लगइतीं
ताहि पर मईया के झुलुआ झूलइति
देवल गमकइती छिटवइति छाक चानना
त रुनु झुनू ना ,बजवइतीं बारहो बजना
कोरे कलशवा में गंगा जल भरिति
पुड़िया पकाई माई खाती हम धरिति
चुनरी चढईती लाल- लाले चूड़ी कँगना
त रुनु झुनू ना ,बजवइतीं बारहो बजना
खोजी कवनो गायक से पचरा गवइति
पाण्डेय मुकेश " से रहिया धोवइति
पाँव पर पटकी माथ करत रहिति वंदना
त रुनु झुनू ना ,बजवइतीं बारहो बजना
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