छलक रही है नशीली शराब आँखों से
टपक रहा है किसी का शबाब आँखों से
हमारे दिल में वो मेहमान बन के बैठे हैं
पढ़ाई है हमें दिल की किताब आँखों से
बस इक झलक में ही दीवाने दिल लूटा बैठे
उठाई यार ने जिस दम नक़ाब आँखों से
ग़रज़ नहीं है हमें मैक़दे से ऐ वाईज़
हमें पिलाई गयी है शराब आँखों से
इशारा आँखों से जिस को किया था महफ़िल में
दिया है उसने भी हमको जवाब आँखों से
वो आँखें नीची किया चुप खड़े हैं क्या कीजे
न जाने जायेगा कब तक हिज़ाब आँखों से
छिटक रही है चारों तरफ़ ख़ुदा की क़सम
छिटक रहा है किरन आफ़ताब आँखों से
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