दगा किसी का सगा नही दगा न करियो भाई
मरवाना चाहे था ब्राह्मण को ,मर गया ख़ुद नाई
बुरा कहो मत बुरा सुनो मत ,बुरा किसी का न कर बन्दे
हर देगा हरि कष्ट तेरे तू बिलकुल नहीं डरे बन्दे।। टेक।।
नौ महीने तक नर्क कुण्ड में रही भटकती खोड़ तेरी
हाड़ मांस के बंद लगाकर दी कंचन काया जोड़ तेरी।। टेक।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें