शनिवार, 15 अगस्त 2015

समर्पित परिवेश को - डॉ. मुकेश पाण्डेय

अपने जीवन की कटुता 
लो आज तुम्हे लौटा दूँ 

मेरी मन की सुख क्रीड़ा 
साधना अनंत वर्षों की 
मेरे मन का अन्तर्दुख 
छाया जग अभिशापों की 
अमरत्व पिया है जिनका 
मैंने प्यासे अधरों से 
वह सत्य तुम्हे लौटा दूँ 


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