माई आव आव आव आव
हे सेवका के श्रद्धा पुराव
दिलवा के दियरी में नेहिया के बाती
श्रद्धा के तेलवा जराईं दिन राती
बानी शरण में आके उठाव
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कईले जोगाड़ बानी फूल पान पात
एतना से बेसी हमार नईखे अवक़ात
कवने विधि करीं पूजन बताव
हमरा त अन्न धन चाहीं ना ज़ियादा
मुकेश"के मांगे के बा एकहि इरादा
अपना भक्तन में भक्ति जगाव

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