हो गयी शाम जाम दे साक़ी
अपनी चाहत के नाम दे साकी
आज एक ऐसा दौर चल जाए
मैं पियूं और नशा तुझे आए
दोस्ती का वो जाम दे साक़ी
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| डॉ मुकेश पाण्डेय |
रंग है रूप है जवानी है
आज भी शाम क्या सुहानी है
अब तो लहरा के जाम दे साक़ी
प्यार की वो शराब हो ऐसी
मयकशी लाज़वाब हो ऐसी
ज़िन्दगी भर जो काम दे साक़ी
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