रहम हरगिज़ न कीजिये साहब
शौक से जान लीजिये साहब
बज़्मे-दुश्मन और आपके जलवे
ज़ख्म ऐसे न दीजिये साहब
साँस उखड़ी है और खुली आँखें
हो सके तो पसीजिए साहब
मस्तिए-इश्क़ चाहते हो अगर
उनकी आँखों से पीजिये साहब
कोई दिल को अगर मांगे मुकेश "
मैं भी कह दूंगा लीजिये साहब
शौक से जान लीजिये साहब
बज़्मे-दुश्मन और आपके जलवे
ज़ख्म ऐसे न दीजिये साहब
साँस उखड़ी है और खुली आँखें
हो सके तो पसीजिए साहब
मस्तिए-इश्क़ चाहते हो अगर
उनकी आँखों से पीजिये साहब
कोई दिल को अगर मांगे मुकेश "
मैं भी कह दूंगा लीजिये साहब
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